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योजना: इसके तहत हर महीने प्रति ...

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देश में बने सबसे पहले विमान वा...

‘प्रोग्रेस ऑन सेनिटेशन एंड ड्रिंकिंग वाटर 2012 अपडेट’ शीर्षक से विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन/यूनिसेफ की रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍वच्‍छता सुविधाओं का उपयोग करने वाली आबादी 33 प्रतिशत थी।
सहस्‍त्राब्‍दि विकास लक्ष्‍यों के तहत वर्ष 2015 तक 54.5 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को स्‍वच्‍छता सुविधाएं उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य तय किया गया है। 
स्‍वच्‍छता संबंधी कार्यों की प्रगति में तेजी लाने और सहस्‍त्राब्‍दि विकास लक्ष्‍यों की भी पूर्ति करने के लिए भारत सरकार ने संपूर्ण स्‍वच्‍छता अभियान (टीएससी) में आमूल-चूल बदलाव किया है, जिसका नाम अब 12वीं पंचवर्षीय योजना में निर्मल भारत अभियान हो गया है। निर्मल भारत अभियान का उद्देश्‍य संपूर्ण समुदायों में चरणबद्ध रूप से और सैचुरेशन मोड में स्‍वच्‍छता सुविधाओं का प्रावधान करके व्‍यवहार में स्‍थायी बदलाव लाना है, जिसका परिणाम ‘निर्मल ग्रामों’ के रूप में सामने आएगा। इस नई कार्यनीति का उद्देश्‍य समुदाय सैचुरेशन दृष्‍टिकोण अपनाकर ग्रामीण भारत को ‘निर्मल भारत’ बनाना है।
 
निर्मल भारत अभियान की कार्यनीति में (क) प्रत्‍येक शौचालय के लिए और अधिक प्रोत्‍साहन राशि का प्रावधान करना, (ख) शौचालय के निर्माण के लिए आर्थिक प्रोत्‍साहन देने हेतु पात्र श्रेणियों को व्‍यापक बनाना, जिसमें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के परिवारों, छोटे और सीमांत किसानों के परिवारों, वासभूमि वाले भूमिहीन मजदूरों, शारीरिक रूप से विकलांगों के परिवारों और जिस परिवारों की मुखिया महिलाए हैं, उन परिवारों जैसे गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले निर्धारित परिवार शामिल हैं और (ग) लाभार्थियों के लिए शौचालय के निर्माण हेतु अधिकतम 4500 रूपए की अतिरिक्‍त राशि की सहायता का प्रावधान करने के लिए महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से तालमेल करना शामिल हैं। निर्मल भारत अभियान का लक्ष्‍य 2022 तक सभी ग्रामीण परिवारों को शत-प्रतिशत स्‍वच्‍छता सुविधाएं उपलब्‍ध कराना है।

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